रेप केस में बड़ा मोड़: बयान झूठे निकले, हाईकोर्ट ने लड़की को किया गिरफ्तार

लखनऊ : 3 जून 2025 दीपक गुप्ता के जीवन में बड़ा तूफ़ान लेकर आया था। मोहनलालगंज के रहने वाले दीपक पर पड़ोस में रहने वाली युवती रिंकी ने शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने, फिर दूसरी जगह शादी कर धोखा देने का आरोप लगाया था। मामले में रेप और SC-ST एक्ट की धाराएँ भी लगाई गईं, जिसके बाद दीपक को जेल तक जाना पड़ा और उसका परिवार व सामाजिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

लेकिन अदालत के ताज़ा फैसले ने पूरा मामला पलट दिया है।

जांच और सुनवाई के दौरान रिंकी के बयान कई बार बदलते दिखाई दिए। शिकायत के समय उसने मेडिकल परीक्षण कराने से मना कर दिया था। अदालत में जब उससे सवाल हुए, तो वह अपनी ही बातों में उलझती चली गई। इसी बीच, सबूतों से यह भी सामने आया कि जिस तारीख को घटना होने का दावा किया गया था, उस दिन दीपक एक अलग जगह मौजूद था। यानी कथित घटना हुई ही नहीं।

जांच में यह संकेत भी मिले कि दीपक की शादी की जानकारी मिलने के बाद रिंकी नाराज़ थी और गुस्से में उसने यह मामला दर्ज कराया। अदालत ने इसे सोची-समझी साजिश मानते हुए कहा कि कानून का गलत इस्तेमाल किया गया।

नतीजा यह हुआ कि अब रिंकी को ही सजा सुनाई गई है।
SC-ST एक्ट की विशेष अदालत ने उसे झूठा मुकदमा दर्ज कराने का दोषी मानते हुए तीन साल की कठोर कैद और 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। आदेश के अनुसार, जुर्माने की आधी राशि दीपक को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
विशेष लोक अभियोजक अरविंद मिश्रा का कहना है कि अदालत ने साफ कहा है—रिंकी ने जानबूझकर दीपक को फँसाने और जेल भेजने की कोशिश की। यदि उसे सरकारी सहायता मिली है, तो उसकी वापसी भी सुनिश्चित की जाएगी।

लखनऊ में यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर दीपक को राहत मिलते हुए न्याय मिला, वहीं दूसरी ओर झूठे आरोपों का मामला उजागर होने से SC-ST एक्ट के दुरुपयोग पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।